Tuesday, 16 February 2016

समझोते...

दुनिया में सीखा मैंने बस इतना ही हंसते रोते
हालात से करने पड़ते हैं कई बार कई समझोते

दामन भर ना सही लेकिन खुशियो  के दो पल ही सही
ऊपर वाले की मर्जी से दो पल अच्छे तो मिले होते...

मेरे स्वभाव की शालीनता मेरी चंचलता को छिपाती है
मैं हंसता हूँ,मुस्काता हूँ,आंसू से चेहरा धोते धोते

हर सपने को गोद उठाकर प्यार से समझाना पड़ता है
नींद में देखे सारे ख्वाब पूरे नहीं होते

घर बार,हसरत,सपने,मेरा महबूब तक मुझसे छीन लिया
ना दुनिया ना दौलत,बस काश वो मेरे होते.....

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