मैं ये नहीं चाहता की तुम मेरी बात को समझो
मैं ये चाहता हूँ की तुम मेरे हालात को समझो
अकेले में बैठ गुनगुनाना,आपस में रूठना मनाना
जीवन इतना ही नही होता,मेरे जज्बात को समझो
मैं ये चाहता हूँ की......
मेरे रस्ते हैं अंधियारे,तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है
दिन दोपहर में रहने वालो,शाम और रात को समझो
मैं ये चाहता हूँ की....
अब मैं पत्थर सा मजबूत नही,रेत सा बिखर चुका हूँ
ऊपर से मेरे भाग्य में होती,भारी बरसात को समझो।।।।।
मैं ये चाहता हूँ की तुम मेरे हालात को समझो
अकेले में बैठ गुनगुनाना,आपस में रूठना मनाना
जीवन इतना ही नही होता,मेरे जज्बात को समझो
मैं ये चाहता हूँ की......
मेरे रस्ते हैं अंधियारे,तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है
दिन दोपहर में रहने वालो,शाम और रात को समझो
मैं ये चाहता हूँ की....
अब मैं पत्थर सा मजबूत नही,रेत सा बिखर चुका हूँ
ऊपर से मेरे भाग्य में होती,भारी बरसात को समझो।।।।।
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