Tuesday, 16 February 2016

हालात को समझो

मैं ये नहीं चाहता की तुम मेरी बात को समझो
मैं ये चाहता हूँ की तुम मेरे हालात को समझो

अकेले में बैठ गुनगुनाना,आपस में रूठना मनाना
जीवन इतना ही नही होता,मेरे जज्बात को समझो
मैं ये चाहता हूँ की......

मेरे रस्ते हैं अंधियारे,तुम्हारा भविष्य उज्ज्वल है
दिन दोपहर में रहने वालो,शाम और रात को समझो
मैं ये चाहता हूँ की....

अब मैं पत्थर सा मजबूत नही,रेत सा बिखर चुका हूँ
ऊपर से मेरे भाग्य में होती,भारी बरसात को समझो।।।।।

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