तुम इसे दिवाली कहते हो???
जब दिल खाली हो और गला सोने से भरा पड़ा हो
आंख बेरंग आंसुओ ओर जिस्म रंग बिरंगे कपड़ो से सजा हो
चारो तरफ हो रौशनी, ओर जिगर में अंधेरा हो
बिजली के बल्ब से ज्योत जगे,उसे पूजा की थाली कहते हो
तुम इसे दिवाली कहते हो??
जब स्वार्थ भाव मे आकर मिठाई बांटी जाती है
मेहंदी लगाने के लिए ब्यूटी पार्लर वाली आती है
जब घर के आंगन में किराए की बल्व वाली लड़ियाँ लगती है
रात को छत पर रहने की बजाए टीवी के आगे बैठे रहते हो
तुम इसे दिवाली कहते हो???
जब बाजारों में श्याम की मूर्ति कम और सलमान की फोटो ज्यादा बिकती है
मोटरों की भीड़ में दुनिया पैदल चलने से थकती है
दो बहन का इकलौता भाई भीड़ में लड़कियां छेड़ने जाता हो
खीर हलवे की जगह चाउमीन,मोमोज में खुश रहते हो
तुम इसे दिवाली कहते हो???
जब औरतें घर के बुढो से बोलते समय ऊंची आवाज करे
जब बेटा बाप की ना मानकर अपने मन की बात करे
लक्ष्मी पूजन बस पैसा पाने का जरिया हो
पत्नि घर मे अकेली ओर पतिदेव ठेके पर रहते हों
तुम इसे दिवाली कहते हो????
गले लगाकर सबको जब हंसी होंठ पर आती है
पूजा सबके साथ कर घर की लक्ष्मी तिलक लगाती है
पूजा की थाली से दिए जलाकर घर की मंडेर पे रखे जाते हैं
आस-पड़ोस के सारे बच्चे साथ पटाखे छुड़ाते हैं
खाना बनाने से पहले माँ की राय ली जाती है
खीर की पहली कटोरी बाबुजी को थमाई जाती है
जब छोटा बच्चा जिद्द करके सबको हंसाता है
"गुरू"का मन तब हर्षाता है
जब बच्चे बूढो की ओर बूढ़े बच्चों की खुशियों में खुश रहते हैं
हम उसे दिवाली कहते हैं।।।।।।
हम उसे दिवाली कहते हैं।।।।
जब दिल खाली हो और गला सोने से भरा पड़ा हो
आंख बेरंग आंसुओ ओर जिस्म रंग बिरंगे कपड़ो से सजा हो
चारो तरफ हो रौशनी, ओर जिगर में अंधेरा हो
बिजली के बल्ब से ज्योत जगे,उसे पूजा की थाली कहते हो
तुम इसे दिवाली कहते हो??
जब स्वार्थ भाव मे आकर मिठाई बांटी जाती है
मेहंदी लगाने के लिए ब्यूटी पार्लर वाली आती है
जब घर के आंगन में किराए की बल्व वाली लड़ियाँ लगती है
रात को छत पर रहने की बजाए टीवी के आगे बैठे रहते हो
तुम इसे दिवाली कहते हो???
जब बाजारों में श्याम की मूर्ति कम और सलमान की फोटो ज्यादा बिकती है
मोटरों की भीड़ में दुनिया पैदल चलने से थकती है
दो बहन का इकलौता भाई भीड़ में लड़कियां छेड़ने जाता हो
खीर हलवे की जगह चाउमीन,मोमोज में खुश रहते हो
तुम इसे दिवाली कहते हो???
जब औरतें घर के बुढो से बोलते समय ऊंची आवाज करे
जब बेटा बाप की ना मानकर अपने मन की बात करे
लक्ष्मी पूजन बस पैसा पाने का जरिया हो
पत्नि घर मे अकेली ओर पतिदेव ठेके पर रहते हों
तुम इसे दिवाली कहते हो????
गले लगाकर सबको जब हंसी होंठ पर आती है
पूजा सबके साथ कर घर की लक्ष्मी तिलक लगाती है
पूजा की थाली से दिए जलाकर घर की मंडेर पे रखे जाते हैं
आस-पड़ोस के सारे बच्चे साथ पटाखे छुड़ाते हैं
खाना बनाने से पहले माँ की राय ली जाती है
खीर की पहली कटोरी बाबुजी को थमाई जाती है
जब छोटा बच्चा जिद्द करके सबको हंसाता है
"गुरू"का मन तब हर्षाता है
जब बच्चे बूढो की ओर बूढ़े बच्चों की खुशियों में खुश रहते हैं
हम उसे दिवाली कहते हैं।।।।।।
हम उसे दिवाली कहते हैं।।।।
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