प्रशिक्षण शिविर में आपका स्वागत् है:-(10-11 मार्च को ट्रेनिंग सेंटर गुड़गांव में हुई ट्रेनिंग में लिखी और सबके सामने पढ़ी एक कविता
थोड़ा आगे बढ़ने की बारी है
कुछ गधो के घोडा बनने की तैयारी है
आदरणीय महोदय,कुछ समझायेंगे,कुछ नया सिखाएंगे
जो हमे सिखाएंगे,वो शाखा में नहीं करवाएंगे
और जो शाखा में करवाना है वो यहाँ नहीं बताएंगे
विचित्र बेवकूफी,विचित्र समझदारी है
कुछ गधो के घोड़ा बनने की तयारी है
कल शाखा में ग्राहक आएंगे,हम उन्हें समझायेंगे
अधिकारी से मिलवायेंगे,अधिकारी रूचि नहीं दिखाएंगे
हम बात सम्भालते हुए बोलेंगे,प्रिय ग्राहक बैठो, चाय की चुस्कियां लेंगे
ग्राहक बोलेगा,समय नही है,आप 10 रूपये देदो हम रस्ते में पी लेंगे
हम कहेंगे चाय तो 5 में आती है आप 10 क्यू लेंगे
ग्राहक बोलेगा,खाली चाय,समोसे के पैसे नहीं देंगे
हम माथा फोटते हुए सोचेंगे की 10 रूपये देने में समझदारी है
कुछ गधो के घोडा बनने की तयारी है
कुछ महोदय तो एक तरफा पट्टी पढ़ा रहे हैं
कर्मचारी कम और जेहादी ज्यादा बना रहे हैं
कर्तव्य और कर्म के प्रति मेरी पूर्ण जिम्मेदारी है
पर अधिकारी भी समझे की मेरा स्वाभिमान निजी है ना की सरकारी है
कुछ मनुष्यो को प्रोफेशनल बनाना जारी है
कुछ गधों को बनने की तयारी है
क्यू ना पूछा जाए की तुम क्या कर सकते हो
फिर प्रतिभा परखकर निखारा जाये
प्रशिक्षण देकर पखारा जाये
सब कुछ सही मायने में सुधारा जाये
तब हमे प्रशिक्षण और संस्था दोनों प्यारी है
कुछ गधो को मनुष्य और मनुष्यो को योग्य बनाना जारी है
हम भी कुछ करना चाहते हैं
कन्धे से कन्धा मिलाकर चलना चाहते हैं
बिना शर्तों के सवेधानिक सुअवसर मिले
सब प्रेम सहित एक साथ चलें
भेद भाव छोडो,कोन हल्का है कोन भारी है
अब आगे बढ़ने की तैयारी है
कुछ के लिए ये अनुभव है,कुछ के लिए कविता है
मेरे लिए लिखने की स्वतंत्रता है,जागरूकता है
प्रशिक्षण के प्रति मेरी प्रतिपुष्टि(feedback)है,मेरे प्रति सत्यता है
आपके प्रति कटु विवेचन है
गलतियां माफ़ करें यही निवेदन है
कहे "गुरू"सुनो सज्जन प्यारे
खुद को काबिल बनाने की हमारी भी जिम्मेदारी है
गधो को घोडा नहीं,सामान्य को विशेष बनाने की तयारी है.......।।।।
थोड़ा आगे बढ़ने की बारी है
कुछ गधो के घोडा बनने की तैयारी है
आदरणीय महोदय,कुछ समझायेंगे,कुछ नया सिखाएंगे
जो हमे सिखाएंगे,वो शाखा में नहीं करवाएंगे
और जो शाखा में करवाना है वो यहाँ नहीं बताएंगे
विचित्र बेवकूफी,विचित्र समझदारी है
कुछ गधो के घोड़ा बनने की तयारी है
कल शाखा में ग्राहक आएंगे,हम उन्हें समझायेंगे
अधिकारी से मिलवायेंगे,अधिकारी रूचि नहीं दिखाएंगे
हम बात सम्भालते हुए बोलेंगे,प्रिय ग्राहक बैठो, चाय की चुस्कियां लेंगे
ग्राहक बोलेगा,समय नही है,आप 10 रूपये देदो हम रस्ते में पी लेंगे
हम कहेंगे चाय तो 5 में आती है आप 10 क्यू लेंगे
ग्राहक बोलेगा,खाली चाय,समोसे के पैसे नहीं देंगे
हम माथा फोटते हुए सोचेंगे की 10 रूपये देने में समझदारी है
कुछ गधो के घोडा बनने की तयारी है
कुछ महोदय तो एक तरफा पट्टी पढ़ा रहे हैं
कर्मचारी कम और जेहादी ज्यादा बना रहे हैं
कर्तव्य और कर्म के प्रति मेरी पूर्ण जिम्मेदारी है
पर अधिकारी भी समझे की मेरा स्वाभिमान निजी है ना की सरकारी है
कुछ मनुष्यो को प्रोफेशनल बनाना जारी है
कुछ गधों को बनने की तयारी है
क्यू ना पूछा जाए की तुम क्या कर सकते हो
फिर प्रतिभा परखकर निखारा जाये
प्रशिक्षण देकर पखारा जाये
सब कुछ सही मायने में सुधारा जाये
तब हमे प्रशिक्षण और संस्था दोनों प्यारी है
कुछ गधो को मनुष्य और मनुष्यो को योग्य बनाना जारी है
हम भी कुछ करना चाहते हैं
कन्धे से कन्धा मिलाकर चलना चाहते हैं
बिना शर्तों के सवेधानिक सुअवसर मिले
सब प्रेम सहित एक साथ चलें
भेद भाव छोडो,कोन हल्का है कोन भारी है
अब आगे बढ़ने की तैयारी है
कुछ के लिए ये अनुभव है,कुछ के लिए कविता है
मेरे लिए लिखने की स्वतंत्रता है,जागरूकता है
प्रशिक्षण के प्रति मेरी प्रतिपुष्टि(feedback)है,मेरे प्रति सत्यता है
आपके प्रति कटु विवेचन है
गलतियां माफ़ करें यही निवेदन है
कहे "गुरू"सुनो सज्जन प्यारे
खुद को काबिल बनाने की हमारी भी जिम्मेदारी है
गधो को घोडा नहीं,सामान्य को विशेष बनाने की तयारी है.......।।।।
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